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फेफड़ों की सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¨ के कारण
कà¥à¤› टà¥à¤¯à¥‚मर फेफड़े में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ शà¥à¤µà¤¾à¤¸ नली की शाखाओं में होते हैं, जो सांस लेते वकà¥à¤¤ शà¥à¤µà¤¾à¤¸ नली के अंदर जाने वाली हवा को पहà¥à¤‚चने में बाधा उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करते हैं। जिसके परिणाम सà¥à¤µà¤°à¥‚प फेफड़े में पूरी हवा नहीं पहà¥à¤‚च पाती और फेफड़ा सिकà¥à¤¡à¤¼ कर रह जाता है। अगर किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का किनà¥à¤¹à¥€à¤‚ कारणों से पूरा फेफड़ा या कà¥à¤› हिसà¥à¤¸à¤¾ सिकà¥à¤¡à¤¼ गया है और पूरी तरह से फूल नहीं रहा है या फिर छाती में पानी या मवाद इकटà¥à¤ ा होने पर उसे निकालने के लिठछाती में टà¥à¤¯à¥‚ब डाली गई थी और छाती में à¤à¤• हफà¥à¤¤à¥‡ तक टà¥à¤¯à¥‚ब रखने के बावजूद à¤à¥€ फेफड़ा अà¤à¥€ तक सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¾ हà¥à¤† है और सारी कोशिशों के बावजूद फेफड़ा फूल नहीं रहा है। à¤à¤¸à¥€ परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में हाथ पर हाथ धरकर मत बैठिठऔर वगैर समय नषà¥à¤Ÿ किठतà¥à¤°à¤‚त किसी बड़े असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में किसी अनà¥à¤à¤µà¥€ थोरेसिक सरà¥à¤œà¤¨ से परामरà¥à¤¶ लें। कà¤à¥€-कà¤à¥€ चिकितà¥à¤¸à¤• छाती में इकटà¥à¤ े हà¥à¤ मवाद को इंजेकà¥à¤¶à¤¨ व सूई दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ निकालते रहते हैं। इसका नà¥à¤•सान यह होता है कि à¤à¤• तो मवाद पूरा निकल नहीं पाता और इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ छाती के अंदर बना ही रहता है और दूसरी तरफ फेफड़ा सिकà¥à¤¡à¤¼ जाता है और नषà¥à¤Ÿ होना शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है। अगर आपका à¤à¤• तरफ का फेफड़ा सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¾ हà¥à¤† है और छाती में टà¥à¤¯à¥‚ब पड़ी हà¥à¤ˆ है, तो हमेशा किसी à¤à¤¸à¥‡ बड़े असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में जाà¤à¤‚, जहां à¤à¤• अनà¥à¤à¤µà¥€ थोरेसिक सरà¥à¤œà¤¨ की चौबीस घंटे उपलबà¥à¤§à¤¤à¤¾ हो और उसके साथ ही साथ अतà¥à¤¯à¤¾à¤§à¥à¤¨à¤¿à¤• जांचें जैसे मलà¥à¤Ÿà¥€ सà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¡ सीटी टैकà¥à¤¸à¤²à¤¾ à¤à¤®.आर.आई व थोरेकोसà¥à¤•ोपी की सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ हो कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इन जांचों के आधार पर ही सिकà¥à¤¡à¤¼à¥‡ फेफड़े के इलाज की दिशा का निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ होता है। सिकà¥à¤¡à¤¼à¥‡ फेफड़े को अपनी पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में लाने व दूसरे फेफड़े को होने वाली कà¥à¤·à¤¤à¤¿ से बचाने के लिठआपरेशन ही à¤à¤•मातà¥à¤° इलाज है। मरीज को चाहिठकि आपरेशन करवाने में आनाकानी न करे, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि आपरेशन में कोताही बरतने से फेफड़ा तो खोना ही पड़ेगा पर उसके साथ- साथ जान à¤à¥€ जा सकती है। सिकà¥à¤¡à¤¼à¥‡ फेफड़े के आपरेशन में कई विधियां अपनाई जाती हैं, जैसे डीकोरटिकेशन और इमà¥à¤ªà¤¾à¤¯à¥‡à¤®à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¤®à¥€ जिसमें फेफड़े को जकड़ने वाली à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ व ठोस मवाद को आपरेशन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ निकाल कर फेफड़े को सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° किया जाता है। जिससे फेफड़ा सांस खींचने पर आसानी से फूल कर अपनी सामानà¥à¤¯ अवसà¥à¤¥à¤¾ को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर सके।
यह आपरेशन सिकà¥à¤¡à¤¼à¥‡ फेफड़े के आरंà¤à¤¿à¤• दिनों में बहà¥à¤¤ ही सफल व कारगर साबित होता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि आरंà¤à¤¿à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ में सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¾ फेफड़ा दबाव में तो होता है, पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¤—à¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ नहीं होता। इलाज में लापरवाही मंहगी पड़ सकती है। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे आपरेशन में टालामटोल करने पर फेफड़े का कà¥à¤› या पूरा हिसà¥à¤¸à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दिन सिकà¥à¤¡à¤¼à¥‡ रहने के कारण नषà¥à¤Ÿ हो चà¥à¤•ा होता है, तो आपरेशन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ हटाने के साथ- साथ फेफड़े के कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¤—à¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ हिसà¥à¤¸à¥‡ को à¤à¥€ बाहर निकालना पड़ता है। इस आपरेशन को लोबेकà¥à¤Ÿà¤®à¥€ कहते हैं। कà¤à¥€ कà¤à¥€ सिकà¥à¤¡à¤¼ गठफेफड़े को पूरा ही निकालना पड़ता है। जब यह फेफड़ा नषà¥à¤Ÿ होने के साथ टी.बी के कीटाणà¥à¤“ं का पिटारा बन चà¥à¤•ा होता है। à¤à¤¸à¥‡ नषà¥à¤Ÿ हà¥à¤ फेफड़े को जितनी जलà¥à¤¦à¥€ शरीर से बाहर निकाल दिया जाà¤, उतना ही मरीज की जान बचने के आसार होते हैं। इस आपरेशन को मेडिकल à¤à¤¾à¤·à¤¾ में नà¥à¤¯à¥‚मोनेकà¥à¤Ÿà¤®à¥€ कहते हैं। फेफड़े के आपरेशन के लिठअनà¥à¤à¤µà¥€ बेहोशी देने वाले डाकà¥à¤Ÿà¤° का होना बहà¥à¤¤ आवशà¥à¤¯à¤• है। आपरेशन के बाद à¤à¤• अतà¥à¤¯à¤¾à¤§à¥à¤¨à¤¿à¤• आईसीयू इंटेंसिव व अनà¥à¤à¤µà¥€ कà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤•ल केयर सà¥à¤ªà¥‡à¤¶à¤²à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ की उपलबà¥à¤§à¤¤à¤¾ का होना बहà¥à¤¤ जरूरी है। साथ ही साथ कृतà¥à¤°à¤¿à¤® शà¥à¤µà¤¾à¤¸ यंतà¥à¤°à¥‹à¤‚ (वेंटीलेटर) की आईसीयू में पà¥à¤°à¤šà¥à¤° मातà¥à¤°à¤¾ में उपलबà¥à¤§à¤¤à¤¾ हो। असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ करते वकà¥à¤¤ इन सब बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इन सब की सिकà¥à¤¡à¤¼à¥‡ फेफड़े के सफल इलाज में अहम à¤à¥‚मिका है। अकसर देखा गया है कि जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° दिल का आपरेशन करने वालों को फेफड़े के आपरेशन का जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ अनà¥à¤à¤µ नहीं होता है। इसलिठसरà¥à¤œà¤¨ का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ करते समय इस बात का à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें।
छाती चोट के इलाज में बरती गई लापरवाही का नतीजाः बायां फेफड़ा सिकà¥à¤¡à¤¼ गया और मरीज छाती में टà¥à¤¯à¥‚ब डलवाठमहीनों से असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤²à¥‹à¤‚ के चकà¥à¤•र लगा रहा था। इस à¤à¤• साल के बचà¥à¤šà¥‡ में निमोनिया के इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ का सही इलाज न होने के कारण दायां फेफड़ा सिकà¥à¤¡à¤¼ कर नषà¥à¤Ÿ होने की कगार पर पहà¥à¤‚च गया। फेफड़ा बचाने के लिठआपरेशन करना पड़ा। टी.बी के इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ के कारण दायां फेफड़ा फूलने में à¤à¤• सफल आपरेशन के बाद ही फेफड़ा अपनी असमरà¥à¤¥ पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में वापस आ पाया।
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